आरक्षण के लिए अब आर-पार की लड़ाई लड़ेंगे गुर्जर

कार्तिक कपूर

जयपुर. राजस्थान हाईकोर्ट की ओर से शुक्रवार को आरक्षण विधेयक.2015 को रद्द कर दिया है जिससे आरक्षण की लड़ाई लड़ रहे गुर्जरों में खलबली का माहौल बन चुका है. जस्टिस मनीष भंडारी की अदालत में सुनाए गए इस फैसले के बाद अब गुर्जरों को एसबीसी के तहत 5 फीसदी आरक्षण नहीं दिया जाएगाण् गुर्जरों को आरक्षण देने वाले आरक्षण विधेयक 2015 को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर 100 से ज्यादा पेज के इस फैसले में हाईकोर्ट ने आरक्षण विधेयक.2015 को रद्द कर दिया. उल्लेखनीय है कि हाईकोर्ट ने जाट आरक्षण के मामले में दिए 10 अगस्तए2015 के फैसले में सरकार को स्थाई वैधानिक पिछड़ा वर्ग आयोग बनाने के आदेश दिए थेण् यही कारण है कि 10 अगस्तए 2015 के बाद सरकार यदि किसी जाति को आरक्षण देती है तो केवल स्थाई पिछड़ा वर्ग आयोग की सिफारिश पर ही दे सकती है. पुरानी रिपोर्ट के आधार पर 10 अगस्तए2015 के आदेश के बाद कोई नया कानून बनाना गलत हैण् क्यों कि उक्त आदेश में कोर्ट ने सरकारी आदेश से बने आयोग को गलत मानते हुए स्थाई वैधानिक आयोग बनाने के आदेश दिए थेण् इसलिए बिना अध्ययन व स्थाई वैधानिक आयोग की सिफारिश के आरक्षण विधेयक.2015 असंवैधानिक व गलत है अतरू इसे रद्ध किया जाए. गुर्जर समाज के प्रतिनिधियों ने इस फैसले से गहरी नाराजगी जाहिर की हैण् उन्होंने कहा कि श्अब आर.पार की लड़ाई होगीश्ण् गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति के प्रवक्ता हिम्मत सिंह ने कहा है कि कि इस मामले में गुर्जर समाज को धोखा दिया गया है.

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